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भाग XVI

कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध

अनुच्छेद 330–342A

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अनुच्छेद 330

330. लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण -- (1) लोक सभा में -- (क) अनुसूचित जातियों के लिए; '[(ख) असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य अनुसूचित जनजातियों के लिए; और] (ग) असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए, स्थान आरक्षित रहेंगे | (2) खंड (1) के अधीन किसी राज्य थृया संघ राज्यक्षेत्र| मैं अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, लोक सभा में उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्, को आबंटित स्थानों की कुल संख्या से यथाशक्य वही होगा जो, यथास्थिति, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्] की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्| की या उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र| के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जनसंख्या का अनुपात उस राज्य [या संघ राज्यक्षेत्र| की कुल जनसंख्या से है | (3) खंड (2) में किसी बात के होते हुए # ए भी, लोक सभा में असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, उस राज्य को आबटित स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो उक्त स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है ।] “स्पष्टीकरण -- इस अनुच्छेद में और अनुच्छेद 332 में, “जनसंख्या” पद से ऐसी अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना में अभिनिश्चित गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं: सरल इस स्पष्टीकरण में अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के प्रति, जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं, निर्देश का, जब तक सन्‌ [2026] के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के सुसंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह "200] की जनगणना के प्रति निर्देश है ।] '[330क. लोक सभा में महिलाओं के लिए स्थानों का आरक्षण -- (1) लोक सभा मैं महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित किए जाएंगे। (2) अनुच्छेद 330 के खंड (2) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के

अनुच्छेद 330A

330A. यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई स्थान अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों से संबन्धित महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे | (3) लोक सभा में प्रत्यक्षनिर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के यथाशक्य निकटतम . एक-तिहाई स्थान (जिसके _अंतर्गत _अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबन्धित महिलाओं के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी रश्थि लिल है) महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे |]

अनुच्छेद 331

331. लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व -- अनुच्छेद 8] में किसी बात के होते हुए भी, यदि राष्ट्रपति की यह राय है कि लोक सभा में आंग्ल- भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है तो वह लोक सभा मैं उस समुदाय के दो से अनर्धिक सदस्य नामनिर्देशित कर सकेगा |

अनुच्छेद 332

332. राज्यों की. विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण -- (1) “*** प्रत्येक राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों के लिए और [असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर] अन्य अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे । (2) असम राज्य की विधान सभा में स्वशासी जिलों के लिए भी स्थान आरक्षित रहेंगे | (3) खंड (1) के अधीन किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात पात, उस विधान सभा में स्थानों की_ कुल संख्या से यथाशक्य वही होगा जो, , उस राज्य की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य की या उस राज्य के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है । “[(3क) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, सन्‌ [2026] के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के आधार पर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या के, अमर च्छेद 70 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान ऐसे किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे, वे -- (क) यदि संविधान (सत्तावनवां संशोधन) अधिनियम, 1987 के प्रवृत्त होने की तारीख को ऐसे राज्य की विद्यमान विधान सभा में (जिसे इस खंड में इसके मैं इसके पश्चात्‌ विद्यमान विधान समा कंहा गया है सभी स्थान अनुसूचित के सदस्यों द्वारा धारित हैं तो, एक स्थान को छोड़कर सभी स्थान होंगे; और थानों (ख) किसी, अन्य दशा में, उतने स्थान होगे जिनकी संख्या का अनुपात, सः की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की (उक्त तारीख को यंथाविद्यमान) संख्या का अनुपात विद्यमान विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से हैं ।] '[(3उख) खंड (3) में किसी बात के होते हए भी, सन्‌ *[2026] के पश्चात्‌ की गई पहली. जनगणना के आधार पर, त्रिपुरा राज्य की विधान सभा में स्थानों की संख्या के, अनुच्छेद 70 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान उस विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों तया के लिए आरक्षित किए जाएंगे वे उतने स्थान होंगे जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल हल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सक्षी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की, संविधान (बहत्तरवां संशौंधन) अधिनियम, 1992 के प्रवृत्त होने की तारीख को यथाविद्यमान संख्या का अनुपात उक्त तारीख को उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से है |] थानों (4) असम राज्य की विधान सभा में किसी लि स्वशासी जिले के लिए आरक्षित सः की संख्या का अनुपात, उस विधान सभा. में स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगां जो उस जिले की जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है । लि लि ** असम के किसी स्वशासी जिले न लिए आरक्षित स्थानों के निर्वाचन-क्षेत्रों मैं उस के बाहर का कोई क्षेत्र समाविष्ट नहीं होगा | (6) कोई व्यक्ति जो असम राज्य के किसी स्वशासी जिले की अनुसूचित ज़नजाति का सदस्य नहीं है, उस राज्य की विधान सभा के लिए ** उस जिले के किसी निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा: “परंतु असम राज्य की विधान सभा के निर्वाचनों के लिए, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्‌ क्षेत्र जिला में सम्मिलित निर्वाचनभ्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों और गैर-अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व, जो उस प्रकार अधिसूचित किया गया था और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला के गठन से पूर्व विद्यमान था, बनाएं रखा जाएगा |] '[332क. (1)राज्यों की विधान सभाओं में महिलाओं के लिए स्थानों का आरक्षण -- (1) प्रत्येक राज्य की विधान सभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित किए जाएंगे | (2) अनुच्छेद 332 के खंड (3) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के

अनुच्छेद 332A

332A. यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई स्थान अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे | (3) प्रत्येक राज्य की विधान सभा में प्रत्यक्षनिर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई स्थान (जिसके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित महिलाओं के लिए स्थानों की संख्या भी सम्मिलित है) महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे |]

अनुच्छेद 333

333. राज्यों की विधान सभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व -- अनुच्छेद 70 में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी राज्य के राज्यपाल “*** की यह राय है कि उस राज्य की विधान सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व आवश्यक है और उसमें उसका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है तो वह उस विधान सभा में भूउस समुदाय का एक सदस्य नामनिर्देशित कर सकेगा] |

अनुच्छेद 334

334. “स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का कतिपय अवधि के पश्चात्‌ न रहना|--इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,-- (क) लोक सभा में और राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों के आरक्षण संबंधी; और (ख) लोक सभा में और राज्यों की विधान सभाओं में नामनिर्देशन द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रतिनिधित्व संबंधी, इस संविधान के उपबंध इस संविधान के प्रारंभ से '[खंड (क) के संबंध में अस्सी वर्ष और खंड (ख) के संबंध में सत्तर वर्ष] की अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेंगे: परन्तु इस अनुच्छेद की किसी बात से लोक सभा मैं या किसी राज्य की विधान सभा में किसी प्रतिनिधित्व पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक, यथास्थिति, उस समय विद्यमान लोक सभा या विधान सभा का विघटन नहीं हो जाता है | थू334क. महिलाओं के लिए स्थानों के आरक्षण का प्रभावी होना -- (1) इस भाग या राज्य की विधान सभा और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में महिलाओं के लिए स्थानों के आरक्षण से संबंधित संविधान के उपबंध, संविधान (एक

अनुच्छेद 334A

334A. सौ छठवां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रारंभ के पश्चात पहली जनगणना के उपबंध, संविधान के सुसंगत आकड़ों को प्रकाशित किए जाने के पश्चात प्रभावी होंगे तथा इसके ऐसे प्रारंभ से पन्द्रह वर्ष की अवधि का अवसान होने पर प्रभावी नहीं रहेंगे। (2) अनुच्छेद 239कक, अनुच्छेद 330क और अनुच्छेद 332क के उपबंधो के अधीन रहते हुए; लोक सभा, किसी राज्य की विधान सभा और दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में महिलाओं के लिए आरक्षित स्थानों का, उस तारीख तक, जो संसद, विधि द्वारा, अवधारित करें, आरक्षित रहना जारी रहेगा | (3) लोक सभा, किसी राज्य की विधान सभा और दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में महिलाओं के लिए आरक्षित स्थानों का चक्रानुक्रम, प्रत्येक पश्चात्वर्ती परिसीमन कार्य के पश्चात उस रूप में प्रभावी होगा, जैसा संसद्‌ विधि द्वारा अवधारित करें । (4) इस अनुच्छेद की कोई बात, किसी राज्य की विधान सभा या दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में किसी प्रतिनिधित्व को तब तक प्रभावित नहीं करेगी, जब तक की उस समय विद्यमान लोक सभा, किसी राज्य की विधान सभा या दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा का विघटन नहीं हो जाता है ।]

अनुच्छेद 335

335. सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे -- संघ या किसी राज्य के कार्यकलाप से संबंधित सेवाओं और पदों के लिए नियुक्तियां करने में, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के दावों का प्रशासन की दक्षता बनाए रखने की संगति के अनुसार ध्यान रखा जाएगा: [परन्तु इस अनुच्छेद की. कोई बात अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के पक्ष में, संघ या किसी राज्य के कार्यकलाप से संबंधित सेवाओं के किसी वर्ग या वर्गों में या पदों पर प्रोन्नति के मामलों में आरक्षण के लिए, किसी परीक्षा में अहक अंकों में छूट देने या मूल्यांकन के मानकों को घटाने के लिए उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी ।]

अनुच्छेद 336

336. कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष उपबंध -- (1) इस संविधान के प्रॉरंभ के पश्चात, प्रथम दो वर्ष के दौरान, संघ की रेल, सीमाशुल्क, डाक और _तार संबंधी सेवाओं में पदों के लिए आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों की नियक्तियां उसी आधार पर की जाएंगी जिस आधार पर 45 अगस्त, 1947 से ठीक पहले की जाती थीं | प्रत्येक उत्तरवर्ती दो वर्ष की अवधि के दौरान उक्त समुदाय के सदस्यों के लिए, उक्त सेवाओं में आरक्षित पदों की संख्या ठीक पूर्ववर्ती दो वर्ष की अवधि के दौरान इस प्रकार आरक्षित संख्या से यथासंभव निकटतम दस प्रतिशत कम होगी: हो जाएंग 5 इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष के अंत में ऐसे सभी आरक्षण समाप्त जाएंगे | (2) यदि आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्य अन्य समुदायों के सदस्यों की तुलना में गुणागुण के आधार पर नियुक्ति के लिए अर्हित पाए जाएं तो खंड (1) के अधीने उस समुदाय के लिए आरक्षित पदौ से भिन्न या उनके अतिरिक्त पदों पर आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों की नियुक्ति को उस खंड की कोई बात वर्जित नहीं करेगी |

अनुच्छेद 337

337. आंग्ल-भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शैक्षिक अनुदान के लिए विशेष उपबंध -- इस संविधान के प्रारंभ के पश्चात्‌, प्रथम तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंग्ल- भारतीय समुदाय के फायदे के लिए शिक्षा के संबंध में संघ और *“*** प्रत्येक राज्य द्वारा वही अनुदान, यदि कोई हों, दिए जाएंगे जो 3। मार्च, 1948 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में दिए गए थे | प्रत्येक उत्तरवर्ती तीन वर्ष की अवधि के दौरान अनुदान ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्ष की अवधि की अपेक्षा दस प्रतिशत कम हो सकेंगे: परन्तु इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष के अंत में ऐसे अनुदान, जिस मात्रा तक वे आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष रियायत है उस मात्रा तक, समाप्त हो जाएंगे: परन्तु यह और कि कोई शिक्षा संस्था इस अनुच्छेद के अधीन अनुदान प्राप्त करने की तब तक हकदार नहीं होगी जब तक उसके वार्षिक प्रवेशों में कम से कम चालीस प्रतिशत प्रवेश आंग्ल-भारतीय समुदाय से भिन्न समुदायों के सदस्यों के लिए उपलब्ध नहीं किए जाते हैं ।

अनुच्छेद 338

338. [राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग] -- '['[(1) अनुसूचित जातियों के लिए एक आयोग होगा जो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नाम से ज्ञात होगा | (2) संसद्‌ू द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आयोग एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा, अवधारित करे ।] (3) राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को नियुक्त करेगा | (4) आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति होगी | (5) आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह, -- (क) अनुसूचित जातियों **** के लिए इस संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या सरकार के किसी आदेश के अधीन उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे और उन पर निगरानी रखे तथा ऐसे रक्षोपायों के कार्यकरण का मूल्यांकन करे; (ख) अनुसूचित जातियों **** को उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने की बाबत विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच करे; (ग). अनुसूचित जातियों !*** के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग ले और उन पर सलाह दे तथा संघ और किसी राज्य के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करे; (घ) उन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे में प्रतिवर्ष, और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को प्रतिवेदन दे; (ड) ऐसे प्रतिवेदनों में उन उपायों के बारे मैं जो उन रक्षोपायों के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा किए जाने चाहिएं, तथा अनुसूचित जातियों. '*** के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिएँ अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करे; और . , (च) 0 अनुसूचित जातियों '*** के सरक्षण, कल्याण, विकास तथा उन्नयन के. संबंध में ऐसै अन्य न्य कर कृत्यों का निर्वहन करे जो राष्ट्रपति, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधीं के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा विनिर्दिष्टे करे | (6) राष्ट्रपति ऐसे सभी प्रतिवेदनों को ससद्‌ के प्रत्येक सेदन के समक्ष रखवाएगा और उसके साथ संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज़ापन भी होगा संबंधित (7) जहां कोई ऐसा ,, या उसका कोई भाग किसी ऐसे विषय से संबंधित है जिसका किसी राज्य सरकार से संबंध है तो ऐसे प्रतिवेदन की एक प्रति उस राज्य के राज्यपाल को भेज़ी जाएगी जो उसे राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा और उसके साथ राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा | ह ही (8) आयोग को खंड (5 के उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी, विषय का अन्वेषण करते समय या उपखंड (खो मे निर्दिष्ट ,किसी परिवाद के बारे में जांच करते समय, विशिष्टतया निम्नलिखित के संबंध, में, वे सभी शक्तियां होंगी जो वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को हैं, अर्थात: -- (क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; (ख) किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अपेक्षा करना; करना; दस्तावेजों (ड) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना; . (च) कोई अन्य विषय जो राष्ट्रपति,_नियम दुवारा, अवधारित करे | (9) संघ और प्रत्येक राज्य गज्य सरकार अनसूचित जातियों '*** को प्रभावित करने

अनुच्छेद 338A

338A. वाले सभी महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर आयोग सै परामर्श करेगी |] (0)] इसे अनुच्छेद में, अनुसूचित जातियों '*** के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि इसके अंतर्गत *«+* आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रति निर्देश भी है देश भी है | । “[338क. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग -- (1) अनुसूचित जनजातियों के लिए एक आयोग होगा जो राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के नाम से ज्ञात होगा | (2) संसद्‌ द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबधों के अधीन रहते हए, आयोग एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा अवधारित करे | (3) राष्ट्रपति, अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को नियुक्त करेगा | (4) आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति होगी | (5) आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह, -- (क) अनुसूचित जनजातियों के लिए इस संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या सरकार के किसी आदेश के अधीन उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे और उन पर निगरानी रखे तथा ऐसे रक्षोपायों के कार्यकरण का मूल्यांकन करे; (ख) अनुसूचित जनजातियों को उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने के सम्बन्ध मैं विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच करे; (ग). अनसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग ले और उन पर सलाह दे तथा संघ और किसी राज्य के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करे; ्ि समयों (घ) उन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे. में प्रतिवर्ष और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करे; (ड) ऐसी रिपोर्टों में उन उपायों के बारे मैं, जो उन रक्षोपायों के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा किए जाने, चाहिएं, तथा अनुसूचित जनजातियों के असंरकण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिएं अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करे; और (च). अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और विकास तथा उन्नयन के संबंध में ऐसे अन्य कत्यों का निर्वहन करे जो राष्ट्रपति, संसद द्वारा बलाई गई किसी विधि के उपबंधो के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा विनिर्दिष्ट कं (6) राष्ट्रपति ऐसी. सभी रिपोर्टों को संसद्‌ के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा और उनके साथ संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा | (7) जहां कोई ऐसी रिपोर्ट या उसका कोई भाग, किसी ऐसे विषय से संबंधित है जिसका किसी राज्य सरकार से संबंध है. तो ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति उस राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी जो उसे राज्य के विधान-मंडलर के समक्ष रखवाएगा और उसके साथ राज्य से. संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित काईवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा | (8) आयोग को, खंड (5) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी विषय का अन्वेषण करते समय या उपखंड (ख) में निर्दिष्ट किसी परिवाद के बारे में जांच करते समय, विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों के संबंध में, वे सभी शक्तियां होंगी, जो वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को हैं, अर्थात्‌: -- (क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; (ख) किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; (ड) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना; (च) कोई अन्य विषय, जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा अवधारित करे | (9) संघ और प्रत्येक राज्य सरकार, अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित करने वाले सभी महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर आयोग से परामर्श करेगी |]

अनुच्छेद 338B

338B. '[338ख. पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग -- (1) सामाजिक और शैक्षिक इृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए एक आयोग होगा जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के नाम से ज्ञात होगा | (2) संसद्‌ू द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आयोग एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियुक्त किए गए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी, जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा अवधारित करे | (3) राष्ट्रपति, अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को नियुक्त करेगा | (4) आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति होगी | (5) आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह,-- (क) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए इस संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या सरकार के किसी आदेश के अधीन उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे और उन पर निगरानी रखे तथा ऐसे रक्षोपायों के कार्यकरण का मूल्यांकन करे; (ख) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों को उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने के संबंध में विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच करे; (ग) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के संबंध में भाग ले और उन पर सलाह दे तथा संघ और किसी राज्य के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करे; (घ) उन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे में प्रतिवर्ष और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करे; (ड) ऐसी रिपोर्टों में उन उपायों के बारे में, जो उन रक्षोपायों के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा किए जाने चाहिए तथा सामाजिक और शैक्षिक इृष्टि से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करे; और (च) सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण और विकास तथा उन्नयन के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करे, जो राष्ट्रपति, संसद्‌_द्वारा बनाई गई किसी विधि के उंपबंधों के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा विनिर्दिष्ट करे | (6) राष्ट्रपति, ऐसी सभी रिपोर्टों को संसद्‌ के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा और उनके साथ संघ से संबंधित सिफारिशों पर कीं गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा | (7) जहां कोई ऐसी रिपोर्ट या उसका कोई भाग, किसी ऐसे विषय से संबंधित है, जिसका राज्य सरकार से संबंध है, तो ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति उस राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जो उसे राज्य के विधान-मंडलत्र के समक्ष रखवाएगी और उसके साथ राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित कार्रवाई तथा यदि कोई ऐसी सिफारिश अस्वीकृत की गई है तो अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन भी होगा | (8) आयोग को, खंड (5) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी विषय का अन्वेषण करते समय या उपखंड (ख) में निर्दिष्ट किसी परिवाद के बारे में जांच करते समय, विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों के संबंध में, वे सभी शक्तियां होंगी, जो वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को हैं, अर्थात्‌: -- (क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; (ख) किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; (ड) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना; (च) कोई अन्य विषय, जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा अवधारित करे | प्रभार संघ और प्रत्येक राज्य सरकार, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों को प्रभावित करने वाले सभी महत्त्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर आयोग से परामर्श करेगी: [परंतु इस खंड की कोई बात अनुच्छेद 342क के खंड (3) के प्रयोजनों के लिए लागू नहीं होगी ।]

अनुच्छेद 339

339. अनसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में संघ का नियंत्रण -- (1) राष्ट्रपति “*** राज्यीं के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में प्रतिवेदन देने के लिए आयोग की नियुक्ति, आदैश द्वारा, किसी भी समय कर सकेगा और इस संविधान के प्रारंभ से दस वरषें की समाप्ति पर करेगा | आदेश में आयोग की संरचना, शक्तियां और प्रक्रिया परिनिश्चित की जा सकेंगी और उसमें ऐसे आनुषंगिक या सहायक उपबंध समाविष्ट हो सकेंगे जिन्हें राष्ट्रपति आवश्यक या वांछनीये समझे | (2) संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य] को ऐसे निदेश देने तक होगा जो उस राज्य की अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए निदेश में आवश्यक बताई गई स्कीमों के बनाने और निष्पादन के बारे में है ।

अनुच्छेद 340

340. पिछड़े वर्गों की. दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति -- (1) राष्ट्रपति, भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं के और जिन कठिनाइयों को वे झेल रहे हैं उनके अन्वेषण के लिए और उन कठिनाइयों को दूर करने और उनकी दशा को सुधारने के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा जो उपाय किए जाने चाहिएं उनके बारे में और उस प्रयोजन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा जो अनुदान किए जाने चाहिएं और जिन शर्तों के अधीन वे अनुदान किए जाने चाहिएं उनके बारे में सिफारिश करने के लिए, आदेश द्वारा, एक आयोग नियुक्त कर सकेगा जो ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनेगा जो वह ठीक समझे और ऐसे आयोग को नियुक्त करने वाले आदेश में आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाल्री प्रक्रिया परिनिश्चित की जाएगी | (2) इस प्रकार नियुक्त आयोग अपने को निर्देशित विषयों का अन्वेषण करेगा और राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा, जिसमें उसके द्वारा पाए गए तथ्य उपवर्णित किए जाएंगे और जिसमें ऐसी सिफारिशें की जाएंगी जिन्हें आयोग उचित समझे | (3) राष्ट्रपति, इस प्रकार दिए गए प्रतिवेदन की एक प्रति, उस पर की गई कारईरवाई को स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित, संसद्‌ के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा |

अनुच्छेद 341

341. अनुसूचित जातियां -- (1) राष्ट्रपति, “किसी राज्य थुया संघ राज्यक्षेत्] के. संबंध में और जहां. वह. “**. राज्य है. वहां उसके ।. संविधान (एक सौ पांचवां संशोधन) अधिनियम, 202। की धारा 2 द्वारा (तारीख 5-9-202। से) अंतःस्थापित । राज्यपाल '*** से परामर्श करने के पश्चात लोक अधिसूचना.* द्वारा, उन जातियों, मूलवंशों या जनजातियों, अथवा जातियों, मूलवंशों या जनजातियों के भागों या उनमें के यूथों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए शुयथास्थिति,] उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र| के संबंध में अनुसूचित जातियां समझा जाएगा | (2) संसद, विधि द्वारा, किसी जाति, मूलवंश या जनजाति को अथवा जाति, मूलवंश या जनजाति के भाग या उसमें के यूथ को खंड (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना मैं विनिर्दिष्ट अनुसूचित जातियों की सूची में सम्मिलित कर सकेगी या उसमें से अपवर्जित कर सकेगी, किन्तु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय उक्त खंड के अधीन निकाली गई अधिसूचना में किसी पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा |

अनुच्छेद 342

342. अनुसूचित जनजातियां -- (1) राष्ट्रपति, , [किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र] के संबंध में और जहां वह “*** राज्य है वहां उसके राज्यपाल '*** से परामर्श करने के पश्चात लोक अधिसूचना.” द्वारा, उन जनजातियों या जनजाति समुदायों अथवा जनजातियों या जनजाति समुदायों के भागों या उनमें के यूथों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए, थुयथास्थिति,| उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र| के संबंध में अनुसूचित जनजातियां समझा जाएगा | (2) संसद विधि द्वारा, किसी जनजाति या जनजाति समुदाय को अथवा किसी जनजाति या जनजाति समुदाय के भाग या उसमें के यूथ को खंड (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जनजातियें की सूची में सम्मिलित कर सकेगी या उसमें से अपवर्जित कर सकेगी, किन्त जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय उक्त खंड के अधीन निकाली गई अधिसूचना में किसी पश्चात्वर्ती अधिसूचना द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा | .. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (-4-956 से) “या राजप्रमुख” शब्दों का लोप किया गया | '[342क. सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग -- (1) राष्ट्रपति, किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में और जहां वह राज्य है, वहां उसके राज्यपाल से

अनुच्छेद 342A

342A. परामर्श करने के पश्चात्‌ लोक अधिसूचना द्वारा, .'ुर्केट्रीय सूची में सामाजिक और शैक्षिक इृष्टि से ऐसे पिछड़े वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिन्हैं केन्द्रीय सरकार के प्रयोजनों के लिए,] यथास्थिति, उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में सामाजिक और शैक्षिक इृष्टि से पिछड़ा वर्ग समझा जाएगा | (2) संसद, विधि द्वारा, किसी सामाजिक और शैक्षिक इष्टि से पिछड़े वर्ग को खंड (।) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट सामाजिक और शैक्षिक इृष्टि से पिछड़े वर्गों की केन्द्रीय सूची में सम्मिलित कर सकेगी या. उसमें से अपवर्जित कर सकेगी, किन्तु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय उक्त खंड के अधीन निकाली गई अधिसूचना मैं किसी पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।] “स्पष्टीकरण -- खंड (1) और खंड (2) के प्रयोजनों के लिए, “केंद्रीय सूची” अभिव्यक्ति से केंद्रीय सरकार द्वारा और उसके लिए सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की तैयार की गई और रखी गई सूची अभिप्रेत है । (3) खंड (६) और खंड (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हए भी, प्रत्येक राज्य या संघ राज्यक्षेत्र, विधि द्वारा, अपने स्वयं के प्रयोजनों के लिए, सॉमाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की एक सूची तैयार कर सकेगा और रख सकेगा, जिसमें प्रविष्टियां केंद्रीय सूची से भिन्न हो सकेंगी ।] राजभाषा अध्याय 7-- संघ की भाषण

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